अल्प विस्तार फायर एसकेप में

P31-adetailinthefireescape


वह व्यक्ति एक पत्रकार है
बुध्दिमानी उसकी अभिव्यक्ति
और उडनतशतरियां
रखीं हैं निशानियाँ उसके कपोलों पर

उसे केले के फूल पसंद हैं
साथ ही वर्षा की झडी और लकडी की कलाकृतियां
दो खंड वार्तालाप के
एक वाक्य, और कुछ शब्द
उसकी साफ सुथरी तिपाई पालिसी

रक्तस्राव :
कभी – कभी दृढता से चाक करता है वह
अपना शरीर कंठ से
पौरूष तक, एक नौका उतारता है
क्रोधित लहरों पर
बैठा निहारता है
जाने और कितने जलपोत
और उनकी मुठभेड

उनके विषय में मैं कहाँ कुछ जानती हूँ!
मैं उतना ही जानती हूँ
जितना एक कौवे की पुकार
या वीर्य, या तुम
जो बैठे
सुन रहे हो यह

एनट्रापी| उनको
पसंद हैं मेरे पैर की उँगलियों के खड्डे
उसने मांगे हैं डाक से मेरे नख

Original poem in English “A Detail in the Fire Escape” by Linda Ashok